कैंसर जानलेवा बीमारी है इसलिए इस रोग से लोगों का डर लाजमी है मगर सही समय से कैंसर का पता चल जाए, तो इससे बचाव संभव है। कैंसर शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करता है। ब्रेस्ट कैंसर, ब्रेन कैंसर, ब्लड कैंसर, लंग कैंसर, सर्वाइकल कैंसर आदि कैंसर के अलग-अलग प्रकार हैं। दुनियाभर में हर साल लाखों लोग इस बीमारी के कारण मौत के मुंह में समा जाते हैं। इसका कारण रोग की गंभीरता के साथ-साथ कैंसर के संबंध में लोगों की कम जानकारी भी है। जानकारी के अभाव में लोग कैंसर का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं। कैंसर के सेल्स इंसानी शरीर के किसी भी हिस्से को अपना शिकार बना सकते हैं। ब्लैडर कैंसर ऐसा ही कैंसर है जिसमें कैंसर सेल्स रोगी के यूरिनरी ब्लैडर तक पहुंच जाते हैं।

क्या होता है ब्लैडर कैंसर

ब्‍लैडर में कैंसर कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को ही ब्‍लैडर कैंसर कहते है। ब्लैडर की बाहरी दीवार की मांसपेशियों की परत को सेरोसा कहते हैं जो कि फैटी टिश्‍यू, एडिपोज टिश्यूज़ या लिम्फ नोड्स के बहुत पास होता है। ब्‍लैडर वो गुब्बारेनुमा अंग है जहां पर यूरीन का संग्रह और निष्कासन होता है। ब्लैडर की आंतरिक दीवार नये बने यूरीन के सम्पर्क में आती है और इसे मूत्राशय की ऊपरी परत कहते हैं। यह ट्रांजि़शनल सेल्स द्वारा घिरी होती है जिसे यूरोथीलियम कहते हैं। ब्लैडर कैंसर ब्लैडर की परत से शुरू होता है। लगभग 70 से 80 प्रतिशत ब्लैडर कैंसर के मरीज़ों में कैंसर का पता तभी लग जाता है जब यह बाहरी सतह में होता है जबकि यह ब्लैडर की दीवार की आंतरिक सतह में होता है। इस कैंसर का खतरा महिला और पुरुष दोनों को ही होता है। ब्लैडर कैंसर भी अन्य अंगों के कैंसर की तरह खतरनाक है लेकिन इसके लक्षण बहुत सामान्य हैं। इन लक्षणों की जानकारी से कैंसर का शुरुआती स्टेज में ही पता लगाकर समुचित इलाज किया जा सकता है।

ब्लैडर कैंसर के लक्षण

ब्लैडर कैंसर का प्रमुख और पहला लक्षण है बार-बार यूरिनरी इंफेक्शन होना। हालांकि ये यूरिनरी इंफेक्शन नहीं होता मगर शुरुआत में बिना किसी जांच के कैंसर का पता नहीं लगाया जा सकता इसलिए इसे यूरिनरी इंफेक्शन ही मान लिया जाता है। महिलाओं में यूरिनरी इंफेक्शन कॉमन है इसलिए वो ब्लैडर कैंसर के लक्षणों को सामान्य यूरिनरी इंफेक्शन मानकर नजरअंदाज कर सकती हैं। लेकिन अगर आपको यूरिनरी इंफेक्शन की शिकायत बार-बार हो रही है तो इसे नजरअंदाज न करें और चिकित्सक की सलाह से तुरंत जांच करवाएं। सामान्य इंफेक्शन के लक्षणों के अलावा योनि में जलन होना, यूरिना का रंग गहरा होना, यूरिन के साथ खून बहना आदि भी इसके लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा हमेशा बुखार आना, खांसने में खून आना, बार-बार पेशाब होना, रात में जल्दी-जल्दी यूरिन पास करने का मन करना, यूरिन पास करते समय तेज दर्द और जलन होना, कई बार यूरिन आना महसूस होना मगर यूरिन न निकलना, शरीर के एक हिस्से में लोवर बैक पेन और माहवारी में ज्याजा खून निकलना आदि भी ब्लैडर कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है

ब्लैडर कैंसर भी अन्य कई कैंसरों की तरह अनुवांशिक हो सकता है। इसलिए कैंसर के सेल्स आपके परिवार के किसी सदस्य और कई बार तो दूर के भी किसी सदस्य से आपमें आ सकते हैं। जैसे मां, दादी, नानी या वंश से जुड़ी किसी अन्य महिला से ये आपके शरीर में आ सकते हैं। अगर आपको किसी तरह के कोई लक्षण महसूस होते हैं तो सबसे पहले चिकित्सक को दिखाकर इसका उचित इलाज करवाएं ताकि समय रहते इसका इलाज किया जा सके।

बांझपन का भी खतरा

हालांकि सही समय से इलाज शुरू होने पर महिला के पूर्ण स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना ज्यादा होती है लेकिन अगर ब्लैडर कैंसर ज्यादा फैल जाए तो इसके कारण बांझपन भी हो सकता है। दरअसल कैंसर के सेल्स पहले ब्लैडर के अंदरूनी हिस्से को प्रभावित करते हैं और फिर बाहरी हिस्से को। कई बार अंदरूनी हिस्से में कैंसर सेल फैल चुके होते हैं और छोटे-मोटे सामान्य लक्षणों को हम नजरअंदाज करते चलते हैं। ऐसे में कैंसर सेल्स जब बाहरी दीवारों पर दस्तक देते हैं तब इसके लक्षण स्पष्ट नजर आते हैं लेकिन कई मामलों में तब तक देर हो चुकी होती है। कैंसर सेल्स फर्टिलिटी हार्मोन्स और अंडों को भी प्रभावित करते हैं इसलिए महिला को पूर्ण गर्भ धारण करने में परेशानी हो सकती है।

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