ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सभी व्यक्ति की कुंडली में 9 ग्रह होते है जो अपना प्रभाव दिखाते है। इन ग्रहों की स्थिति परिवर्तन के वजह से मनुष्य को समय समय पर अच्छे व बुरे दोनों परिणाम प्राप्त होते है। इन 9 ग्रह में से तीन ग्रह ऐसे है जिनके प्रभाव से मनुष्य घबरा जाता है। ये तीन ग्रह है -राहु, केतु तथा शनि। हिन्दू धर्मशास्‍त्रों में भी शनिदेव का चरित्र भी दण्डाधिकारी के रूप में माना गया है जो कि कर्म और सत्य को जीवन में अपनाने की ही प्रेरणा देता है। लेकिन अगर आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो शास्‍त्रों में बहुत सारे उपाय बताए गए हैं जिससे शनिदेव प्रसन्‍न हो जाएंगे। शनिदेव के प्रसन्‍न होने से आपका जीवन सफल हो जाएगा। तो आइए जानते हैं उन उपायों को

 

 

 

नीम के तेल से अगर लिंग पर मसाज की जाती है तोह उस से लिंग में वृद्धि होती हैं अथवा इससे नपुंसकता और सिघ्र पतन जैसी समया का भी उपचार हो जाता हैं.

 

 

 

 

 

 

अगर आप शनि को प्रसन्न करना चाहते हैं तो शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और दोनों हाथों से पीपल के पेड़ को स्‍पर्श करें। इस दौरान पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें और शनि मंत्र ‘ऊं शं शनैश्‍चराय नम:’ का जाप करते रहना चाहिए, यह आपकी साढ़ेसाती की सभी परेशानियों को दूर ले जाता है। साढ़ेसाती के प्रकोप से बचने के लिए इस दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति को दिन में एक बार नमक विहीन भोजन करना चाहिए।

 

 

 

 

कौंच के सेवन से यौन शक्ति में सुधार होता है और वीर्य के अभाव से उत्‍पन्‍न नपुसंकता नष्‍ट होती है। इसके सेवन से यौन क्षमता बढ़ने से पुरुष देर तक यौन संबंध में संलग्‍न रहकर अधिक यौन आनंद प्राप्‍त कर सकता है। 20 से 30 ग्राम की मात्रा में कौंच के चूर्ण का सेवन कर दूध पीने से यौन शक्ति के साथ शारीरिक क्षमता भी बढ़ती है।
कौंच के सेवन से यौन शक्ति में सुधार होता है और वीर्य के अभाव से उत्‍पन्‍न नपुसंकता नष्‍ट होती है। इसके सेवन से यौन क्षमता बढ़ने से पुरुष देर तक यौन संबंध में संलग्‍न रहकर अधिक यौन आनंद प्राप्‍त कर सकता है। 20 से 30 ग्राम की मात्रा में कौंच के चूर्ण का सेवन कर दूध पीने से यौन शक्ति के साथ शारीरिक क्षमता भी बढ़ती है।

 

 

 

 

अगर आपकी कोई विशेष मनोकामना है तो शनिवार के दिन आप अपने लंबाई का लाल रंग का धागा लेकर इसे आम के पत्‍ते पर लपेट दें। इस पत्‍ते और लपेटे हुए धागे को लेकर अपनी मनोकामना को मन में आवाहन करें और उसके बाद इस पत्‍ते और धागे को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इससे आपकी मनोकामना जल्‍द पूरी होगी।

 

 

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