महिला के गर्भ में नहीं, आंत में बच्चा पल रहा था। प्रसव होने के पहले जब महिला के गर्भाश्य की अल्ट्रासोनोग्राफी करायी गयी तो बच्चे का कुछ भी अता-पता नहीं चला। इसके बाद जब डॉक्टरों ने महिला के पेट की सोनोग्राफी करायी गयी तो हतप्रभ रह गए। बच्चा महिला के आंत में था। एनएमसीएच के डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल साइंस में ऐसे केस बहुत कम देखने को मिलते हैं। यह रेयर होता है। डॉक्टरों ने महिला के पेट का ऑपरेशन कर डेढ़ किलो के नवजात को बाहर निकाला। बच्चे को ऑक्सीजन पर रखा गया है। डॉक्टरों ने कहा कि एनएमसीएच के इतिहास में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने बताया कि यह मेडिकल साइंस में रिसर्च की बात है। डॉक्टरों ने मंगलवार को बांका के बेलहारा निवासी पिंटु कुमार की 23 वर्षीय पत्नी कविता कुमारी के पेट का ऑपरेशन कर डेढ़ किलो का नवजात निकाला है। चार दिन पहले कविता को एनएमसीएच के स्त्री रोग विभाग में डॉ. अलका सिन्हा की यूनिट में भर्ती कराया गया था।

38444489_262733544540680_8846546144768032768_nडॉ. अलका ने कहा कि बच्चे की स्थिति जानने के लिए पहले गर्भाशय की अल्ट्रासोनोग्राफी करायी गयी। वहां बच्चा नहीं मिला। इस पर रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने आशंका जाहिर करते हुए महिला के पेट की सोनोग्राफी करायी। वहां बच्चा आंत में मिला। डॉक्टरों की टीम ने उसकी जान बचाने के लिए तुरंत ऑपरेशन कर बच्चे को निकाला। फिलहाल शिशु को नीकू में डॉ. वीपी जायसवाल की यूनिट में भर्ती कराया गया है। विभागाध्यक्ष डॉ. अलका सिन्हा ने बताया कि बच्चे का पैर टेढ़ा है तथा कुछ देर तक नहीं रोने से उसके दिमाग में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा था। फिलहाल बच्चे को ऑक्सीजन पर रखा गया है। लगभग दो घंटे तक चले इस ऑपरेशन में डॉ. ज्योति गुप्ता, डॉ. अर्चना मिश्रा, डॉ. विनिता सहाय, डॉ. संगीता, डॉ. अमृता, डॉ. विजय कुमार व डॉ. मोती लाल शामिल थे।

इस तरह की प्रेगनेंसी असामान्य होती है। यह रेयर है। इसके दो से तीन कारण हो सकते हैं। आंत में या आंत के बीच में बच्चा फर्टिलाइज हो गया होगा। समय पूरा होने पर बच्चा को ऑपरेशन के जरिए सावधानी बरतनी पड़ती है। – डॉ. चंद्रकिरण, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ38405395_232617567579000_7432437194876256256_n

शिशु को नीकू में डॉ. वीपी जायसवाल की यूनिट में भर्ती कराया गया है। विभागाध्यक्ष डॉ. अलका सिन्हा ने बताया कि बच्चे का पैर टेढ़ा है तथा कुछ देर तक नहीं रोने से उसके दिमाग में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा था। फिलहाल बच्चे को ऑक्सीजन पर रखा गया है।

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